फटा फटी फटटम

फटते ही तो याद आया सुंई धागा

फटटम फटटी का है खेल निराला//
सुख की छांव तो बिसराये भगवान

फटी दिलाती भगवान को निवाला//

ठोकर लगते ही पुकार उठता मनवा

भगवान तू ही तो है सबका रखवाला//

खडा हो गया अपने पैरो पर जब भी

पकडाया प्रभ को उपेक्षा का प्याला//

लुभा लुभाकर प्रीत सब प्रीत बढाते

चाहत सबकी भक्तिभाव का उजाला//

मन्नत पूरी होना करता है पैदा उबासी

निकल जाता है तुरंत बुद्धि का दिवाला//

सचमुच फटटम फटटी है सशक्त ईश्वर

भैया फटटम फटटी का है खेल निराला//

फटफटा फटटम फटटी का रंग निराला

फटा फटी फटटू फटटम का खेल निराला//

“Devta”

पता है,समझ ना पाओगे?.

करतम सो भरतम

बक्लम बक्लम बेअक्लम तक्लम,

तांक में झांख और झांख में तांक,

बदअक्लम बदअक्लम बदअक्लम,

अपनी औलाद और परायी नारियां,

अच्छी लगना है ही खताखुवारियां,

झट झटपट झटकलम झटकलम,

माले मुफ्त दिले बेरहम बदनीयत,

पोल का माल अत्यन्त सुखदायक,

गटागट गटकलम सटासट सटकलम,

माल पराया मगर पेट तो अपना है,

सब समेटकर जेब में हो सपना है,

गठरिया पापी पटकलम पटकलम,

सच्ची बात तो है आसमान सी खरी,

पाप के पीपे कनस्तर नहीं होते बरी,

चाहे जितना उचकलम उचकलम,

आया है जो यहां वो जायेगा जरूर,

बोया है जो यहां वो काटेगा जरूर,

खोया है जो यहां वो पायेगा जरूर,

पाया है जो यहां वो खोयेगा जरूर,

करतम सो भरतम करतम सो भरतम,

पहेली है ये बिल्कुल मकडजाल सी,

जिंदगी है पानी के उतार चढाव सी,

झटपट चटपट समझलम समझलम।।

\\Devta//

\\नूनघाली रोटी//

ये घुंईंयां भी ले लो ये तुरैईंया भी ले लो

भले छीन लो डीजल/पेट्रोल की कनस्तरी

बस लौटा दो वो लाल लाल टमाटर खाने की आजादी//

वो लगोंटी//वो कच्छी में अधछिपी नंगी टांगे

वो धूल्लम धूल सने चेहरे से मारी गयी कुलांचे

वो इक्कल दुक्कल बोलकर मारी गयी छलांगे//

वो चने चबैने सटककर ठंडे पानी की सौगातें

बडे बुडढों को हलकान करती नासमझ आफतें

वो रिश्तेदारों से होने वाली बेझिझक मुलाकातें//

ये पतलून भी ले लो ये लैपटॉप भी ले लो

भले छीन लो ये फ्लैटी/कालोनिया रिहायशें

बस लौटा दो वो छलगैंय्या मारने की आजादी//

ये घुंईया भी ले लो ये तुरैईयां भी ले लो

ये कद्दू भी ले लो ये खीरा ककडी भी ले लो

भले छीन लो पीजा बर्गर चाऊमीन की दुकाने

बस लौटा दो वो नूनघाली रोटी चैन से खाने की आजादी//

\\Devta//

अत्ता पत्ता

रजनीगंधा का फूल//ढाक का पत्ता//

कुदरत ने ही तो बनाया है ये रिश्ता//

झिंगुर जागू राग की धुन बजाता//

मेंढक टर्री ताल से अनहद सजाता//

कोयल का सुर सुरीला बाग गुंजाता//

चांद मुस्कराकर पपीहे को लुभाता//

कौन है जो यह बेनामी रिश्ता बनाता//

कौन है जो रिमझिम पानी बरसाता//

कौन है जो बिन बरसात ओस टपकाता//

कौन है जो काली चादर पर तारे चमकाता//

ये सब नहीं होता तो कवि कल्पना कैसे पाता//

किस ललक में वह यह सब रिश्ते गूंथ जाता//

रजनीगंधा का फूल//ढाक का पत्ता//

शहद भरा मधुमक्खियों का छत्ता//

मत भूलना फिजूल ततैयों का छत्ता//

स्वाद बनाने वाला तेजकरी का पत्ता//

अत्ता पत्ता जिंदगी की पहेली का पत्ता//

\\खंडारी देवता//

(जानता हूं कि मैं जो लिखता हूं वह आप लोग समझ नहीं पाते हैं लेकिन मुझे तो लिखना ही है,लिखता रहूंगा,जो समझे उसका भी भला जो न समझे उसका भी भला)

जंगली

जंगली आदमी था पढे लिखेे अनपढो से आ टकराया//

जानवर को हांकतेे दोपाया जानवर देेेखकर चकराया//

बिना सींग का होता है जानवर सोचकर बेहद घबराया//

रात का चांद दिन में निकला देखकर बेहद शरमाया//

हया शरम की कंगाली का नंगानाच देेखकर थर्राया//

जंगलीपन में है लज्जा की अमीरी सोचकर इठलाया//

//उल्लू बनावईंंग//

लल्लू बनाने के लिए \\चलो दिलदार चलो//चांद के पार चलो//ख्याल अच्छा है,

बनने के लिए \\हम हैं तैयार चलो//चांद के पार चलो//ऐसा साथी बेहद बेहद सच्चा है,

कभी कभी//मेरे दिल में// ख्याल आता है कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए,

कभी कभी ही नहीं//हमेशा ही “दिमाग” में आने वाले ख्याल दिल पर ही तो थोपे जाते हैं,

सुहागरात है//घूंघट उठा रहा हूं मैं//ऐसे ख्यालों ने ही इंसान को मर्द और औरत बनाया है,

तेरा//मेरा प्यार अमर//फिर क्यूं मुझको लगता है डर//जो डरा वो मरा//प्यार क्या खाक अमर है,

रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार बनी//बिल्ली सपने में चूहे देखकर फिजूल बदनाम है।।

\\Devta//

\\उल्लू//का\\चरखा//

मुझे एक बार\\कुदरत//ने बनाकर किया था कमाल

अब हर रोज कुदरत के बनाये हुए नमूने\\बनाते//हैं।।

उन्हें किसी और ने\\उल्लू//का\\चरखा//बनाया था

वो सभी मिलकर मुझे\\चरखा//उल्लू बनाया करते हैं।।

नाव के उपर\\गाडी//के उपर\\नाव//सुना था मैने

हार चुके सभी\\पोत//वह मुझ पर\\चढाया//करते हैं।।

उधारी की\\अगाडी//अगाडी की\\उधारी//का खेल

\\अनाडी//समझकर मुझे\\उधारियां//बताया करते हैं।।

\\अक्कड//बक्कड\\बम्मे//बो गिने गिनाये पूरे\\सौ//

उलझाकर जादुई\\खेल//में गिनती\\सिखाया/करते हैं।।

बने बनाये को बनाने का\\नाम//ही तो है\\चतुराईयां//

इस\\मन्तर//से सभी\\उल्लू का चरखा//बनाया करते हैं।।

\\Devta//